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जिंदगी जिंदाबाद:95% लंग्स इंफेक्शन..50 दिन हॉस्पिटल में..डॉक्टर ने भी हाथ खड़े कर दिए.. कोरोना को हराने वाली 62 साल की उसी रिटायर्ड बैंक मैनेजर की कहानी
उज्जैन की रिटायर्ड बैंक मैनेजर ने लगभग 80 दिन ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहकर और डेढ़ से दो महीने अलग-अलग अस्पतालों में रहकर कोरोना से जंग जीत ली। लंग्स में 95% तक इंफेक्शन (सीटी स्कोर 25/25) तक होने के बाद कोरोना की जंग जीतना बेहद कठिन था। कोरोना से इस जंग को जीतने में परिवार का प्यार काम आया। रिटायर्ड बैंक मैनेजर स्वस्थ्य होकर घर पर ही हैं। पढ़िए कैसे जीत गई जिंदगी-
उज्जैन जिला सहकारी बैंक से मैनेजर से रिटायर्ड हुई 62 वर्षीय उषा निगम अपनी बहन की मौत पर उनके घर देवास चली गई। वहां से तीन दिन बाद जब घर आई तो खांसी के साथ बुखार भी आने लगा। RT-PCR टेस्ट करवाया जहां 20 अक्टूबर 2020 को रिपोर्ट पॉजिटिव बताई। माधवनगर अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती कराया गया। 22 अक्टूबर को पहला सिटी स्कैन कराया तो रिपोर्ट में लंग्स में इंफेक्शन जीरो आया।
दो दिन बाद ही 24 अक्टूबर को हालत बिगड़ने पर माधवनगर अस्पताल के ICU में भर्ती करना पड़ा। रेमडेसिविर के 6 इंजेक्शन लगाए लेकिन सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। लगातार हालत बिगड़ने लगी। इसके बाद उन्हें 29 अक्टूबर को इंदौर अरविंदो अस्पताल रैफर कर दिया गया।
30 अक्टूबर को फिर से सिटी स्कैन कराया तो मात्र 8 दिन में लंग्स इंफेक्शन बढ़कर 65 प्रतिशत हो गया। इसके बाद हालत लगातार खराब होते गए लेकिन बेटे और बहू ने साथ नहीं छोड़ा। PPE किट पहनकर अस्पताल में मिलने गए। रोजाना घर से खाने भेजने की व्यवस्था की। रेमडेसिविर के 5 इंजेक्शन का डोज फिर लगा लेकिन इसके बावजूद भी डॉक्टर ने कहा- केस रिकवर करना मुश्किल ही है। दूसरी कोरोना रिपोर्ट भी पॉजिटिव आ गई। प्लाज्मा चढ़ा, 40-40 हजार के दो इंजेक्शन फिर लगे।
कुल 12 रेमडेसिविर लग चुके थे। इसके बाद आखिरकार 12 नवम्बर को निगेटिव रिपोर्ट आई। इसके बाद भी सांस लेने में दिक्कत बरकार थी। 14 नवंबर को सामान्य ICU में शिफ्ट किया।
डॉक्टर ने कहा- मरीज के पास समय नहीं
छोटी बहू ने अपने हाथों से खाना खिलाया। ब्रश कराया, कपड़े बदले क्योंकि निगेटिव आने के बाद भी उषा निगम बैठ भी नहीं पाती थी। 26 नंवबर को फिर सिटी स्कैन कराया तो पता चला कि लंग्स में इंफेक्शन बढ़कर 95% हो गया है। डॉक्टर ने कहा कि बहुत कम समय है मरीज के पास। क्योंकि इंफेक्शन बढ़ गया है और फाइब्रोसिस डिटेक्ट हुआ है।
इसके बाद मरीज की जिद पर 2 दिसंबर को डिस्चार्ज करवाकर ऑक्सीजन सपोर्ट पर घर ले आए और करीब 20 फरवरी 2021 तक घर पर ऑक्सीजन पर उषा निगम रही। इस बीच परिवार वालों ने खूब हौसला बढ़ाया। फिजियोथैरेपी की मदद से उठना-बैठना चलना शुरू करवाया। इसके बाद अब अपने घर पर बिल्कुल स्वस्थ है। अपना काम स्वयं कर लेती है।
ICU में 40 दिन रहीं तब घर वालों ने बर्थ डे और मैरिज एनिवर्सरी वहीं मनाई
उषा निगम की बीमारी की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि संक्रमित होने के बाद शुरुआती चार दिन नॉर्मल कोरोना वार्ड में बाकी के 40 दिन आईसीयू में भर्ती रही। इंदौर अरविंदो अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद घर पर छोटी बहू छाया निगम ने छोटे बच्चे की तरह अपनी सास का ध्यान रखा। पलंग पर ही शौच कराने से लेकर शरीर पर स्पंज करना शामिल है। इस दौरान घर पर लगी ऑक्सीजन के लिए दोनों बेटे ध्यान रखते थे ताकि खत्म होते ही ऑक्सीजन की व्यवस्था की जा सके। परिवार के लोगों ने घर पर उषा निगम का आत्मविश्वास बढ़ाया और उस दौरान पूरा समय मरीज के साथ रहकर खुशियां साझा की। इस दौरान जन्मदिन और शादी की सालगिरह भी मां के साथ मनाई।
डॉक्टर द्वारा फिजियोथेरेपी घर पर ही कराई जाती थी। इस दौरान काफी दर्द भी सहा मरीज ने लेकिन परिवार के सदस्यों ने दिन में कई बार थैरेपी करवाना शुरू किया। इसका परिणाम यह निकला कि धीरे-धीरे उन्होंने चलना शुरू किया। उनका आत्मविश्वास बढ़ गया और दो महीने से ज्यादा समय से घर पर लगी ऑक्सीजन भी निकाल दी।
यह रही सामान्य डाइट
गरम खाना, दूध, नियमित दवाई, फल, प्रोटीन पाॅवडर, ज्यूस, नारियल का पानी, हरी सब्जी, दलिया, हलवा।